पिछले तीन दशक में भारतीयों की उम्र 10 साल से ज्यादा बढ़ी, ब्लड शुगर और हाई बीपी से भी बड़ी मौत का कारण एयर पॉल्यूशन है।

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पिछले तीन दशक में भारतीयों की उम्र 10 साल से ज्यादा बढ़ी, ब्लड शुगर और हाई बीपी से भी बड़ी मौत का कारण एयर पॉल्यूशन है।


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  • 1990 से 2020 तक भारत की औसत जीवन प्रत्याशा; भारत में किस राज्य में उच्च जीवन प्रत्याशा है? केरल से उत्तर प्रदेश

एक घंटा पहले

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  • रिसर्च में मौत के 286 बड़े कारण, 369 तरह की बीमारियां और इंगुएरी जैसे रिस्क फैक्टर शामिल हैं
  • शोध रिपोर्ट कहती है कि 2019 में सिर्फ प्रदूषण से 1.67 लाख मौतें हुईं

देश में लोगों की औसत आयु बढ़ रही है। पिछले तीन दशक में लोगों की उम्र 10 साल तक बढ़ी है। चौंकाने वाली बात यह है कि अलग-अलग राज्यों में इंसान की उम्र का आंकड़ा भी अलग है। केरल में इंसान की औसत आयु 77.3 साल है तो उत्तर प्रदेश में 66.9 साल है। यह दावा लैंसेट जर्नल में पब्लिश रिसर्च में किया गया है।

लैंसेट की रिसर्च कहती है कि 1990 में लोगों की औसत आयु 59.6 साल की थी जो 2019 में 70.8 साल से अधिक हो गई। अनुसंधान में मृत्यु के 286 बड़े कारण, 369 तरह की बीमारियां और इंग्युरी जैसे रिस्क फैक्टर शामिल किए गए हैं। साथ ही 200 से अधिक देश और टेरिटरी को भी हिस्सा बनाया गया।

अब बात उन कारणों की जो उम्र पर बुरा असर डालती हैं

1. कैंसर में कैंसर की दर लगातार बढ़ रही है

वाशिंगटन विश्वविद्यालय के रिसर्चर अली मॉकड के मुताबिक, भारत सहित दुनिया के देशों में संक्रामक रोग घट रहे हैं, लेकिन पुरानी बीमारियों का आंकड़ा बढ़ गया है। अली कहते हैं कि भारत में मातृ मृत्यु दर घट रही है। बीमारियों में हृदय रोग कभी पहले पायदान पर था, जो अब पांच स्थान पर है। लेकिन, सबसे खतरनाक बात यह है कि कैंसर की दर लगातार बढ़ रही है।

2. प्रदूषण, हाई बीपी और ब्लड शुगर ने मौतों का आंकड़ा बढ़ाया

रिसर्च रिपोर्ट कहती है कि 2019 में सिर्फ प्रदूषण से 1.67 लाख मौतें हुई हैं। इसके बाद दूसरे रिस्क फैक्टर में हाई ब्लड प्रेशर, तंबाकू, खराब डाइट और हाई ब्लड शुगर रहे हैं, जो मौत का आंकड़ा बढ़ गया है। कोविड से होने वाली मौतों में इन फैक्टर्स का बड़ा रोल रहा है। रिसर्चर्स का कहना है कि पिछले 30 साल में भारत में मोटापा और ब्लड शुगर लोगों की जिंदगी छीनी हैं।

3. 30 वर्ष में नॉन-कम्युनिकेशंस डिसीज में 29% की वृद्धि देश में 58% बीमारियों का कारण नॉन-कम्युनिकेशंस डिसीज यानी एक से दूसरे में न फैलने वाला रोग। 1990 के मुकाबले इन 29% तक बढ़ा हुआ है। नॉन-कम्युनिकेशंस डिसीज में मोटापा, डायबिटीज, हार्ट डिसीज जैसी बीमारियां शामिल हैं।

पिछले 30 वर्षों में भारतीयों की सेहत में कुछ सुधार हुआ है

रिसर्च के मुताबिक, कोरोनाचल में ऐसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों में मौत का खतरा और भी बढ़ा है। रिसर्चर्स का कहना है कि पिछले 30 सालों में भारतीयों की सेहत में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन बच्चों और गर्भवती महिलाओं में कुपोषण अब भी इनकी मौत का सबसे बड़ा कारण बना है।





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