न्यूबॉर्न कैर वीक: मां कोरोना से चेष्टा तो भी ब्रेस्टफीडिंग जरूरी है, कमरे का तापमान 28 से 32 डिग्री है; ऐसे करें नवजात शिशु की देखभाल

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 न्यूबॉर्न कैर वीक: मां कोरोना से चेष्टा तो भी ब्रेस्टफीडिंग जरूरी है, कमरे का तापमान 28 से 32 डिग्री है;  ऐसे करें नवजात शिशु की देखभाल


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31 मिनट पहले

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  • बच्चे के पास सिर्फ मां और फैमिली मेम्बर्स को ही जाने दें वह भी चेहरे और हाथों को सैनेटाइज करने के बाद

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है, दुनिया में हर दिन 7 हजार नवजातों की मौत हो जाती है। 2018 में 25 लाख बच्चों ने जन्म के पहले ही महीने में दम तोड़ दिया। इस बार नवजातों की देखभाल और बहुत जरूरी है क्योंकि कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है।

हाल ही में मां बनने वाली महिलाओं के मन में कई सवाल हैं, जैसे सतर्क हैं तो ब्रेस्टफीड कराएं या नहीं, नवजात को कोरोना होने का खतरा कितना है, कोरोनाकाल में बच्चे की देखभाल कैसे करें ….। 15 से 21 नवंबर तक मनाए जाने वाले न्यूबॉर्न कैर वीक के मौके जयपुर के जेके लोन अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ। प्रियांशु माथुर ने कोरोनाचल में बच्चों की देखभाल से जुड़े सवालों के जवाब दिए। जानिए इनकी देखभाल कैसे करें…।

3 प्रश्न कोरोनाचल में न्यूबॉर्न की देखभाल से जुड़े

बच्चों में कोरोना के मामले कम क्यों?
बच्चों में कोरोना होने के मामले काफी कम हैं क्योंकि कोरोना जो एसीई 2 रिसेप्टर की मदद से शरीर में एंट्री करता है, बच्चों में ये रिसेप्टर काफी कम पाए जाते हैं। इसलिए ये कोरोना की शुद्धता के मामले उतने सामने नहीं आ रहे जितने बड़ों में आ रहे हैं लेकिन इसका मतलब ये नहीं है लापरवाही बरती जाए। बच्चे के आसपास सिर्फ मां और फैमिली मेम्बर्स को ही जाने दें वह भी चेहरे और हाथों को सैनेटाइज करने के बाद।

मां कोरोना से चेत है तो क्या ब्रेस्टफीड कराए या नहीं?
मां अगर योग्यता तो भी नवजात को ब्रेस्टफीड करा सकती है बशर्ते उसे मुख में लगाना जरूरी है। इसके अलावा खाँसी या छींक के दौरान निकलने वाली लार की बूंदों से बच्चे को बचाएं। नवजात को बाहर के बारे में न जाना। अपनी मर्जी से ब्रेस्टफीडिंग कभी बंद न करें। मां के दूध से ही बच्चे की बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ रही है। यह ध्यान रखें। 6 महीने तक बच्चे को अपना ही दूध पिलाना चाहिए।

सर्दियों में इनकी देखभाल कैसे करें?
सर्दियां शुरू हो चुकी हैं, ये सबसे ज्यादा ठंडे मौसम से ही होता है। जरा सी लापरवाही होने पर वे हाइपोथर्मिया हो सकते हैं। ऐसा होने पर शरीर का तापमान कम हो जाता है। बच्चों तके कंपकंपी, शरीर ठंडा पड़ना और सांसें तेज चलना जैसे लक्षण दिखते हैं। लक्षण दिखने पर डॉक्टरी सलाह लें। सर्दियों से बचाने के लिए उनके शरीर पर कपड़ों की तीन लेयर होनी चाहिए। ध्यान रखें कि जिस कमरे में बच्चा है, वहां का तापमान 28 से 32 डिग्री होना चाहिए।

कब-कौन सायक लगवाना है, यह मत करो

वर्दीसेफ की हालिया रिपोर्ट कहती है, को विभाजित -19 के कारण पूरे दक्षिण एशिया में लगभग 40.5 लाख बच्चों को रेश्युलर लगने वाला टीका नहीं लग पाया है। कोरोना से पहले भी ऐसे स्थितियाँ थीं लेकिन अब और चिंताजनक हो गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर बच्चों को समय से टीका या वैक्सीन नहीं दिया गया तो दक्षिण एशिया में स्वास्थ्य इमरजेंसी का सामना करना पड़ सकता है।

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