कोरोना केस-स्टडी: ऑस्ट्रेलिया में एक ही परिवार के 3 बच्चों में कोरोना के खिलाफ सूरजजे बने लेकिन रिपोर्ट निगेटिव कोर्ट

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कोरोना केस-स्टडी: ऑस्ट्रेलिया में एक ही परिवार के 3 बच्चों में कोरोना के खिलाफ सूरजजे बने लेकिन रिपोर्ट निगेटिव कोर्ट


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एक घंटा पहले

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  • बच्चों के पेरेंट कोरोना से सतर्क थे और साथ रह रहे थे
  • वैज्ञानिकों ने कहा, सूरजज बताती हैं, बच्चे कभी न कभी अस्थिर होते हैं

ऑस्ट्रेलिया के एक परिवार में कोरोना की कलाज मिलने का अनोखा मामला सामने आया है। परिवार में 3 बच्चों में कोरोना के खिलाफ सोनाज मिली है लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि उनकी रिपोर्ट निगेटिव है। बच्चों से लार के नमूनों के बारे में जांच की गई है और रिजल्ट में भारज मिलने की पुष्टि हुई है।

यह पूरा मामला है
बच्चों के पेरेंट्स में कोरोना के लक्षण दिखे थे। इसके बाद दम्पति एक शादी समारोह में पहुंचे। उन बच्चों को लेकर वहां नहीं गए। घर वापस आने के बाद बच्चे उनके संपर्क में भी रहे लेकिन उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई और बजाज बनीं।

इस मामले पर रिसर्च करने वलो मर्डोक चिल्ड्रेंस रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों का कहना है, किसी में सूरज का मिलना यह दर्शाता है कि वह इंसान कभी न कभी सकारात्मक हुआ है। उस समय के वायरस से लड़ने के लिए शरीर में कैंसरज बनीं।

अस्पताल में जांच करने वाली डॉ। मेटनी नीलैंड की रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे कम उम्र वाले बच्चे में कभी भी कोरोना के लक्षण नहीं दिखे लेकिन उसमें सबसे पॉवरफुल ड्रग रेस्पॉन्स देख रहे हैं।

बच्चों में दर्द जैसे लक्षण नहीं दिखते

यह दुर्लभ मामला है जो बताता है कि अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों में कोरोना के खिलाफ इम्यून रेस्पॉन्स अलग-अलग होता है। हाल ही में हुए कुछ रिसर्च ऐसे भी हैं जो बताती हैं कि बच्चों में बड़ों की तरह कोरोना के लक्षण नहीं दिखते हैं।

प्रोफेसर निगेल क्रफर्ड कहते हैं, हर उम्र वर्ग में कोरोना होने के बाद इम्यून रेस्पॉन्स का पता लगाकर बीमारी की गंभीरता और वैक्सीन के असर को समझने में मदद मिलेगी।

संक्रमण के बाद परमानेंट इम्युनिटी डेवलपर नहीं होता है

वैज्ञानिकों के मुताबिक, चार तरह के ह्यूमन कोरोनावायरस होते हैं। सभी से मामूली बीमारियां होती हैं। अधिकांश लोग जीवन में कभी न कभी इन से एक कोरोनावायरस से अस्थिर जरूर होते हैं। खास बात यह है कि हमारा शरीर इन वायरस से लड़ने के लिए परमानेंट इम्युनिटी डेवलपर नहीं करता है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति एक से अधिक बार इन वायरस से आशंकित हो सकता है। वायरस से बचाव के लिए शरीर में बने हुए कोरोनावायरस से बचाव में भी मदद करता है। भले ही यह कुछ समय के लिए हो।

क्या होता है कारें

ये प्रोटीन से बनीं खास तरह की इम्यून कोशिकाएं होती हैं जिन्हें बी-लिम्फोसाइट कहते हैं। जब भी शरीर में कोई बाहरी चीज (फोरेन बॉडीज) पहुंचती है तो ये प्रकट हो जाते हैं। बैक्टीरिया या वायरस के विषैले पदार्थों को निष्क्रिय करने का काम यही सूरज करता है। इस तरह ये शरीर को इम्युनिटी देकर बैक्टीरिया या वायरस के असर को बेअसर करते हैं।

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